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शिक्षक के लिए निर्देश अध्याय 2– भारतीय अर्थ व्यवस्था के क्षेत्रक किसी अर्थव्यवस्था को हम उत्तम ढंग से तभी समझ सकते हैं, जब इसके घटकों या क्षेत्रों का अध्ययन करते हैं। क्षेत्रक व र्गीकरण अनेक मानदंडों के आधार पर किया जा सकता है। इस अध्याय में तीन प्रकार के वर्गीकरणों की चर्चा की गई है– प्राथमिक/द्वितीयक/ तृतीयक; संगठि त/असंगठित और सार्वज निक/निजी। आप दैनिक जीवन में छात्रों से परिचित उदाहरणों के द्वारा इन वर्गीकृत क्षेत्रों के बारे में चर्चा कर सकते हैं। क्षेत्रकों की बदलती भूमिका पर विशेष बल देना आवश्यक है। सेवा क्षेत्रक की तीव्र संवृद्धि की ओर छात्रों का ध्यान आकर्षित करते हुए पुनः इन पर प्रकाश डाला जा सकता है। इस अध्याय में प्रस्तुत धारणाओं की विस्तार से व्याख्या करते समय छात्रों को कुछ मौलिक अवधारणाओं जैसे – राष्ट्रीय आय, रोज़गार इत्यादि से अवगत कराने की ज़रूरत पड़ सकती है। चूँकि छात्रों को इसे समझने में कठिनाई हो सकती है, इसलिए उदाहरण के द्वारा इन्हें स्पष्...